कृषि भूमि के अभिलेखों का दुरुपयोग करके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तकरीबन नौ लाख रुपए निकाल लिया गया केसीसी लोन, भुक्तभोगी ने लिखित शिकायत उच्चाधिकारियों से करके लगाई न्याय की गुहार

पवन प्रभात करछना, प्रयागराज। बैंक प्रबंधन व तहसील प्रशासन की मिली भगत व धन कमाऊ नीति के चलते एक चिकित्सा शिक्षा संस्थान के सीईओ के कृषि भूमि के अभिलेखों का दुरुपयोग करके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्जीवाड़ा करके किसी व्यक्ति की ओर से तकरीबन नौ लाख रुपए की केसीसी ऋण निकाल लिया गया है। बैंक द्वारा वसूली हेतु भेजी गई एनपीए की नोटिस से परिजन अचंभित के साथ चिंतित व मायूस हैं। भुक्तभोगी के भाई की ओर से इसकी लिखित शिकायत जिला अधिकारी समेत पुलिस आयुक्त, थाना प्रभारी नैनी, संबंधित बैंक के महाप्रबंधक के अलावा बैंक के शाखा प्रबंधक से की गई है। और न्याय की गुहार लगाई गई है। करछना थाना क्षेत्र के पड़ोखरा गांव निवासी राकेश कुमार त्रिपाठी उत्तराखंड के हरिद्वार में संजीवनी शिक्षा पीठ में सीईओ के पद पर कार्यरत हैं। उनके फर्जी दस्तावेज व फर्जी आईडी पर किसी व्यक्ति की ओर से बैंक ऑफ़ इंडिया शाखा नैनी से 8 लाख 90 हजार रुपए की केसीसी का लोन ले लिया गया है। पीड़ित के भाई ब्रजेश कुमार त्रिपाठी की ओर से दिए गए उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायती पत्र में यह दर्शाया गया है कि मेरे भाई ने कभी भी इस ऋण के लिए आवेदन नहीं किया और न किसी भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए हैं। और बैंक में उपलब्ध आवेदन पत्र पर लगी फोटो भी मेरे भाई की नहीं है। इससे प्रतीत होता है कि मेरे भाई के नाम एवं भूमि अभिलेखों का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण प्राप्त किया है। उन्होंने आरोप आरोपित किया है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की मिली भगत से मेरे भाई के दस्तावेजों को कूट रचित साजिश करके मेरे भाई के नाम से ऋण आहरण किया गया है। जिससे मेरे भाई की मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक क्षति पहुंची है। तथा मेरे भाई की प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई है। उन्होंने आला अफसरो से तत्काल एफआईआर दर्ज कराने, प्रकरण में संलिप्त सभी व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष व गहन जांच कराने तथा व्यक्ति की संलिप्तता के विरुद्ध विधि के अनुसार कठोर कार्रवाई किए जाने और जांच पूर्ण होने तक मेरे भाई के विरुद्ध किसी भी प्रकार की वसूली की कार्रवाई न किए जाने की मांग की है।

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