मोबाइल में अपराधियों की कुंडली लेकर चल रहे सिपाही,एक क्लिक में मिलेंगी अपराधी की जानकारी

पवन प्रभात फतेहपुर। अब बीट आरक्षी अपने इलाके के अपराधियों की कुंडली जेब में लेकर चल रहे हैं। जिले के 21 थानों (महिला और साइबर थाना छोड़कर) में बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए सात सौ अधिक मोबाइल फोन सिपाहियों को वितरित किए गए हैं। इन मोबाइल में बीट से जुड़े अपराधियों और संदिग्धों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है। जरुरत पड़ने पर बीट आरक्षी मौके पर ही संबंधित व्यक्ति की जानकारी देख सकते हैं और सत्यापन की कार्रवाई को आगे बढ़ा सकते हैं। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू होने के बाद पुलिसिंग में डिजिटल साक्ष्य को मान्यता दी गई है। जिसके बाद बीट आरक्षियों को 735 मोबाइल बांटे गए थे। जिले की सुरक्षा के लिए 21 थाने व कोतवाली है। इनमें 735 बीट निर्धारित हैं। एक जुलाई 2024 से लागू बीएनएस को सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम को बदलकर बनाया गया है। इसके तहत थाने के सभी विवेचकों के मोबाइल फोन पर यूजर आईडी व पासवर्ड जेनरेट किए गए। अब विवेचना से संबंधित सभी साक्ष्य, अपराध के दृश्य को रिकॉर्ड करने, आपराधिक मामलों में तलाशी और जब्तीकरण की कार्रवाई डिजिटल हो रही है। बीट पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह स्मार्टफोन पुलिसकर्मियों को दिए गए हैं।

बीट पुलिसिंग में तैनात आरक्षियों को अपने क्षेत्र के अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों और पहले से आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों की जानकारी रखना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। पहले यह जानकारी बीट रजिस्टर और थाने के रिकॉर्ड से जुटाई जाती थी। मोबाइल मिलने के बाद बीट आरक्षियों के लिए यह काम काफी आसान हो गया है। अपने बीट क्षेत्र में किसी संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि सामने आने पर आरक्षी मोबाइल के जरिए उपलब्ध रिकॉर्ड से उसका मिलान कर सकते हैं।मोबाइल में बीट से संबंधित डिजिटल जानकारी उपलब्ध होने से पुलिसकर्मियों को अपराधी की पहचान, उसके आपराधिक इतिहास और संबंधित पुलिस रिकॉर्ड की जानकारी हासिल करने में मदद मिल रही है। इससे बाहर से आने वाले संदिग्ध लोगों के सत्यापन में भी तेजी आती है। मोबाइल के जरिए बीट आरक्षी अपने क्षेत्र की महत्वपूर्ण सूचनाएं भी अपडेट कर सकते हैं। किसी विवाद, संदिग्ध गतिविधि या कानून-व्यवस्था से जुड़ी सूचना मिलने पर उसे अधिकारियों तक तेजी से पहुंचाना आसान हुआ है।
मोबाइल में उपलब्ध पुलिस के ई-साक्ष्य एप के माध्यम से घटनास्थल की फोटो और वीडियो, डिजिटल साक्ष्य तथा अन्य जरुरी सूचनाएं सुरक्षित तरीके से अपलोड की जाती हैं। इससे जांच को पारदर्शी व सरल बनाने के साथ ही साक्ष्य के रुप में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाता है।

डिजिटल रिकॉर्ड से बीट पुलिसिंग अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनी है। गांव, कस्बे और मोहल्लों में तैनात आरक्षियों के पास अब अपने क्षेत्र से जुड़े अपराधियों की जानकारी हर समय मोबाइल पर ही उपलब्ध रहती है। इससे अपराधियों की निगरानी, सत्यापन और सूचना इकट्ठा करने में समय की बचत होने के साथ पुलिस की पकड़ भी मजबूत हो रही है।

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