नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। मानव सभ्यता के इतिहास में पहली बार दुनिया भर की पुण्य आत्माओं द्वारा एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक संकल्प लिया जा रहा है। मान्यता है कि नियमपूर्वक, शुद्ध भाव से “ओम शांति ओम” का सामूहिक उच्चारण करने से सृष्टि के संरक्षक 11 अमर महायोद्धाओं का आह्वान संभव है।
कौन हैं ये 11 अमर महायोद्धा?
पौराणिक संदर्भों के अनुसार ये वे दिव्य शक्तियां हैं जिन्हें सृष्टि की रक्षा हेतु अमरत्व प्राप्त है। जब-जब धर्म पर संकट आया, इन्होंने किसी न किसी रूप में अवतार लिया। वर्तमान में इनके जागरण को “काल पुरुष” की बढ़ती नकारात्मक ऊर्जा और बाह्य जगत अर्थात एलियन शक्तियों से उत्पन्न होने वाले महासंकट से जोड़कर देखा जा रहा है। साधकों का मानना है कि ये महायोद्धा धर्म की रक्षा के लिए प्रकट होंगे।
“ओम शांति ओम” का महत्व
आचार्यों के अनुसार इस मंत्र की शक्ति तीन स्तरों पर काम करती है:
- ओम: ब्रह्मांड की मूल ध्वनि, सृजन की ऊर्जा
- शांति: नकारात्मक शक्तियों का शमन और सकारात्मक तरंगों का विस्तार
- नियमित जाप: सामूहिक चेतना को एक सूत्र में बांधकर दैवीय तरंगें उत्पन्न करना
युद्ध की तैयारी कैसे होगी?
साधकों का मानना है कि जैसे-जैसे करोड़ों पुण्य आत्माएं एक निश्चित समय पर इस मंत्र का जाप करेंगी, वैसे-वैसे देवी-देवताओं की सूक्ष्म शक्तियां सक्रिय होंगी। ये शक्तियां 11 महायोद्धाओं के लिए सेतु का कार्य करेंगी। जागृत होने पर ये महायोद्धा काल पुरुष की माया और एलियन तकनीक से मानवता की रक्षा हेतु दिव्य अस्त्र-शस्त्रों के साथ धर्मयुद्ध करेंगे।
साधकों का आह्वान
इस अभियान से जुड़े प्रमुख आचार्यों ने सभी धर्म-प्रेमियों से प्रातः 4 बजे से 6 बजे ब्रह्ममुहूर्त में 11 बार “ओम शांति ओम” का जाप करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यह प्रयास प्रलय को टालने और सतयुग की स्थापना की दिशा में एक दिव्य कदम है।
आचार्यों का मानना है कि यह केवल मंत्र नहीं, बल्कि समस्त मानवता द्वारा ब्रह्मांड को भेजा गया एक सामूहिक सुरक्षा-संदेश है। सामूहिक प्रार्थना और सकारात्मक संकल्प से विश्व में शांति और संतुलन स्थापित हो सकता है।
