फतेहपुर जिले के मलवां विकासखंड की अभयपुर ग्राम सभा के गंगा कटरी क्षेत्र में गंगा नदी की कटान से किसानों की फसलें लगातार प्रभावित हो रही हैं। कटान के कारण धान की फसलें गंगा में समाहित हो रही हैं, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।नया खेड़ा गांव के किसान धुन्नी और भूरे ने बताया कि उनकी लगाई गई धान की फसल कटान के कारण गंगा में बह गई है। उनका इंजन भी गंगा की कटान में समाहित हो गया। रमेश निषाद, रामसजीवन निषाद, सदनहा गांव निवासी देशराज और अरविंद सहित कई अन्य किसानों की फसलें भी कटान से नष्ट हो गई हैं।बिंदकी फार्म निवासी सेडान निषाद ने बताया कि अधिकारी आते हैं और स्थिति का जायजा लेकर चले जाते हैं, लेकिन अभी तक फसलों की कटान के संबंध में कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि गंगा की विभीषिका से किसान हर साल जूझते हैं और अपनी फसलें गंवा देते हैं। सरकार द्वारा पूर्व में हुई क्षतिपूर्ति का भी अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया है।सेडान निषाद ने मांग की कि सरकार को इसका उचित समाधान करना चाहिए और पीड़ित किसानों की फसलों का आकलन कर मुआवजा देना चाहिए, ताकि वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कर सकें। चंडिका, नंगू, किशोर, रामदास और अचल बहादुर सहित कई अन्य किसान भी गंगा की कटान से पीड़ित हैं।पूर्व में बिंदकी फार्म के पास पांडु नदी से हुई कटान के कारण अब पांडु नदी का पानी गंगा में गिरने लगा है, जिससे गंगा के जलस्तर में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। अभयपुर ग्राम सभा के ग्राम प्रधान रामदास निषाद ने बताया कि गंगा का जलस्तर भले ही थोड़ा बढ़ा है, लेकिन अभी यह खतरे के निशान से काफी नीचे बह रहा है। उन्होंने भी सरकार से पीड़ित किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करने की अपील की।
